Rajeev kumar

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लेखनी कहानी -01-Dec-2022

पाकर तुझको पा लिया

पाकर तुझको आस्मां पा लिया
इश्क में एक नया जहां पा लिया।
अब छाए न क्यों शुरूर मुझ पे
प्यार तुमसे बेइम्तहां पा लिया।
महक उठे हैं जिन्दगी के विराने
फूल क्या है, पुरा गुलिस्तां पा लिया।
नसीब भी मेहरबां होगा एक दिन
तुम सा जो मैंने मेहरबां पा लिया।
 खौफ था कि ताउम्र प्यार को तरसुंगा
चलते-चलते प्यार इस दरमियां पा लिया।

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3 Comments

Gunjan Kamal

05-Dec-2022 07:36 PM

शानदार

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Mahendra Bhatt

02-Dec-2022 11:25 AM

शानदार

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बहुत खूब

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